Saturday, August 14, 2010

NOTICE is hereby given that with effect from
15th July 2010 the Registered Office of Marg
Publications Private Limited has been changed
from B / 12, Sardaram Park, 34, Sasoon Road,
Pune – 411 001 to Flat I / 004, Ground Floor,
Sonam Chandra, Phase – 1, Old Golden Nest,
Mira Road East. Thane – 401 105. All communi
cations should henceforth be made at the afor
esaid address.
-For Marg Publications Private Limited
By order of the Board,
Mukesh Kumar Masoom
Director
Dated 13th August 2010

Sunday, July 25, 2010

इशक की आग में झुलसता हिन्दुस्तान

इशक की आग में समूचा हिन्दुस्ता झुलस रहा है।पंजाब के कपूरथला और दिल्ली सटे उत्तर परेद्श के जिला बुलंदशहर में एक दिन में इशक के चक्कर में तीन घटनाएं घटी हैं। कोई दिन ऐसा नहीं है जब देश के किसी न किसी हिस्से में दो चार लोग रोजाना इश्क की चक्की में नहीं पिसते हों। कपूरथला के कठुआ में एक पिता ने बेटी को करंट लगा मार डाला। मृतिका का नाम गुरजीत कौर है। पिता ने बेटी के प्रेमी को भी मारने की कोशिश की लेकिन वो बच गया और उसकी सूचना पर पुलिस ने हत्यारे पिता को गिरफ्तार कर लिया।
यूपी के बुलंदशहर में एक युवक की हत्या प्यार करने की वजह से कर दी गई। मृतक जिस लड़की से प्यार करता था वो रिश्ते में उसकी मौसी लगती थी।
यूपी के बुलंदशहर में ही एक ही गोत्र में प्यार करने की सजा दो प्यार करने वालो को मिली। समाज ने उनके प्यार को अस्वीकार कर दिया जसके बाद प्रेमी जोड़े ने जहर खाकर खुदकुशी कर ली।
बुलंदशहर के तनु और गुड़्डू एक दूसरे बेहद प्यार करते थे। दोनों एक ही गोत्र के थे। दोनों ने शुक्रवार को खुदकुशी कर ली। गांव के लोगों के मुताबिक दोनों एक ही कुनबे के थे। जाति और गोत्र भी एक ही था। इसलिए समाज की नजर में वो रिश्ते से भाई बहन थे। कुछ महीने पहले जब घर वालो को दोनों के प्यार का पता चला तो पहरा बिठा दिया गया। घरवाले तो पहले से खिलाफ थे पंचायत भला इस रिश्ते को कैसे मंजूर करती। हारकर दोनों ने मौत को गले लगा लिया ।इस तरह की ज्यादातर घटनाएं पश्चिमी उत्तर प्रदेश या हरियाणा के कुछ जिलों में ज्यादा घाट रही हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ, मुजफ्फरनगर , बुलंद शहर , गाजियाबाद , नॉएडा , अलीगढ़ , आगरा आदि में ओनर किलिंग या इशक में निराश होकर आत्महत्या करने के मामलों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। हरियाणा के झज्जर , रोहतक , फरीदाबाद आदि इलाकों में ऐसी घटनाएं ज्यादा बढ़ रही हैं। सरकार न तो प्यार करने वालों को सुरक्षा उपलब्ध करवा पा रही है और नाही समाज इस तरह के मामलों को स्वीकारने के लिए तैयार है । प्यार के लिए मर मिटने का लड़के -लड़कियों का जूनून कैसे परवान चढ़ा , इसके लिए क्या जिम्मेदार है ? फ़िलहाल यह सवाल करने का वक्त नहीं है। यह समय है इस बीमारी को दूर करने का। मगर इसके लिए कोई प्रयास नहीं कर रहा । प्यार करने वालों और प्यार की बली वेदी पर चढ़ने वालों की संख्या में दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ोतरी होती जा रही है। गाँव और शहरी परिवेश में जमीन आसमान का अंतर होता है। गाँव में अगर किसी की बेटी किसी लड़के के साथ प्यार करती है और उससे शादी कर लेती है तो आसपास के लोग बेटी वाले के परिवार का जीना हराम कर देते हैं। हर पल उसे ताने दिए जाते हैं, उसे नजरों से गिरा दिया जाता है। उन्हीं तानों और बेईज्जती से बचने के लिए बेटी वाले या तो अपनी बेटी को ही मार डालते हैं या फिर बेटी के आशिक को मौत के घात उतार देते हैं। इसका परिणाम ये होता है की लड़का और लडकी वाले दोनों परिवार बर्बाद हो जाते हैं। जबकि अगर समझदारी से काम लिया जाए, या तो उन्हें समझा बुझा दिया जाए या फिर उनकी शादी करवा दी जाए तो सब कुछ ठीक हो सकता है । मगर इसके लिए सरकारी पहल की भी जरूरत है । ऐसे मामले निबटाने के लिए भी एक विशेष आयोग की जरूरत है, जो ऐसा मामला सामने आने पर लड़का और लडकी वालों के बीच पुल का काम कर सके।

Thursday, July 22, 2010

दलित दुलारे , राहुल प्यारे , गए कहाँ रे ...

दलित दुलारे , राहुल प्यारे , गए कहाँ रे ...
पिछले कुछ दिनों से देश के कई राज्यों में कई अनहोनी घटनाएं घटी हैं . सबसे बड़ी दुर्घटना तो केन्द्र में बैठी अंधी , बहरी, लंगडी, लूली और पूरी तरह अपाहिज और अक्षम सरकार द्वारा बार-बार डीजल , पेट्रोल , तेल के दाम बढ़ाना है . मंहगाई से जूझ रहे आम इंसानों को और भी मंगाई की आग में झोंकना है, इसके बाद नक्सलियों द्वारा बेगुनाह सुरक्षाकर्मियों को मौत के घाट उतारना है. रेल दुर्घटना है . जलता हुआ कश्मीर है . राक्षसी बेरोजगारी और भ्रष्टाचार है . ये सब पहले भी थे मगर कुछ महीने से इनमे बहुत ज्यादा इजाफा हुआ है , इनसे पीड़ित होकर पूरा देश रो रहा है , चिला रहा है मगर एक व्यक्ति ऐसा है जों खामोश है . उसका नाम है राहुल गांधी . अपने आपको दलित हितैषी होने का ढिंढोरा पीटने वाले राहुल गांधी न जाने कहाँ गायब हो गए हैं, वे तब भी प्रकट नहीं हो पाए , जब हरदोई से उनकी ब्रिगेड का एक नेता अचानक गायब हो गया और जख्मी हालत में लखनऊ में मिला. वह तो खैर मिल गया मगर राहुल गांधी अभ तक अज्ञातवास में हैं. लोग गाते फिर रहे हैं -दलित दुलारे , राहुल प्यारे , गए कहाँ रे ...चुनाव के समय वे उत्तर प्रदेश के किसी दलित की झोंपडी में रात बिताते किसी टी.वी. में जरूर दिख जायेंगे. अगले दिन के अखबारों में वे किसी दलित बच्चे को गोद में उठाये हुए नजर आयेंगे. मगर जब दलितों की हालत बाद से बदतर की जाती है और करने वाले उनके पाने होते हैं, तब उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रया नहीं आती. न वे प्रेस कोंफ्रेंस करते नजर आते हैं, और न अखबारों में प्रेस विज्ञप्ती ही भेजती हैं. केन्द्र की सरकार कांग्रेस की अगुवाई वाले यू पी ऐ की सरकार है , जिसकी अध्यक्ष सोनिया गांधी हैं. कांग्रेस की अध्यक्ष भी सोनिया गांधी हैं.अक्सर विपक्ष के लोग आरोप लगाते रहे हैं कि प्रधानमंत्री भी रबर स्टेम्प से कम नहीं हैं. यानि कि कुल मिलाकर सोनिया गांधी और राहुल गांधी ही इस देश के रहनुमा हैं. वही शासन चला रहे हैं. वही मंहगाई बढ़ा रहे हैं. शोषितों, पीडितो, दलितों, मुफ्लिशों, बेरोजगारों, किसानों, मजदूरों और आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों का अगर जीना हराम है , तो उसके पीछे इन्हीं मान बेटों का हाथ है . अगर यही लोग इस सबके लिए जिम्मेदार हैं तो गरीबों का मसीहा बनने का नाटक किसलिए , दलितों का सच्चा हितैषी बनने का ढोंग किसलिए ?आम आदमी के साथ होने का ढिंढोरा क्यों ? और नाटक इन्हें करना है तो करें, इनका साथ किसलिए ?देश में दो वर्गों के बीच बहुत बड़ी खाई पैदा कर दी गयी है. गरीब और मेरे के बीच की खाई . सिर्फ कुछ हजार लोगों का देश के सभी संसाधनों पर कब्जा है. देश की समस्त संपत्ति पर कब्जा है और कई करोड लोग दो जून की रोटी खाने तक के लिए मोहताज हैं. शुद्ध पेयजल की छोडिये , उन्हें नाले का गंदा पानी भी नसीब है. अच्छे और नए कपडे की बात अलग है , फटे और पुराने कपडे भी मयस्सर नहीं हैं . इतना बड़ा फर्क किसके शासन में हुआ ? देश पर सबसे ज्यादा राज किसने किया ? जों देश के लिए अन्न उगाते हैं, यानि देश का अन्नदाता अगर आज तक फटेहाल है, सुख सुविधाओं से मोहताज है तो इसका जिम्मेदार कौन है ? अगर मा-बेटे की यह जोड़ी अब भी नींद में सोई है तो देश के नौजवानों के फर्ज बंटा है कि वे जाग जाएँ और अपने हक के लिए शांतिपूर्वक और संवैधानिक तरीके से संघर्ष करें .











शर्मशार होता लोकतंत्र का मंदिर ,
उद्दंड होते जन प्रतिनिधि
बिहार की विधान सभा में जों कुछ हुआ उसे हिन्दुस्तान सहित सारे संसार ने देखा. आज का युग सूचना क्रान्ति का युग है. पलक झपकते ही कोई भी समाचार समस्त विश्व की वेबसाईट पर दिखने लगता है. टी.वी . चैनल द्वारा सब कुछ बहुत जल्द ही दिखा दिया आजाता है . बिहार विधान सभा में जनता के चुने हुए विधायकों को जिस तरह मारपीट करते, गाली -गलौच करते,विधान सभा अध्यक्ष की तरफ चप्पल फेंकते , महिला विधायकों द्वारा मार्शलों पर गमलों से प्रहार करते हुए देखा, उससे लोकतंत्र का मंदिर शर्मशार हो गया. हंगामे के बाद सदन की कार्यवाही दो दिन के लिए स्थगित कर दी गई है। विधायनसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी ने विपक्ष के 67 विधायकों को कार्यवाही बाधित किए जाने और गलत व्यवहार के चलते पूरे मॉनसून सत्र के लिए निलंबित कर दिया।अध्‍यक्ष ने विपक्ष के 67 विधायकों को इस सत्र के लिए निलंबित कर दिया है। इनमें राजद के 42, एलजेपी के 11, कांग्रेस के 02, सीपीआई (एमएल) के 04, बीएसपी के 02, सीपीएम के 02, सीपीआई के ०४ निर्दलीय 02 हैंराजद अध्यक्ष अब्दुल बार सिद्दीकी और सदन में राजद के उप नेता शकील अहमद निलंबितों में शामिल हैं। बिहार हाईकोर्ट ने मुख्यमंत्री समेत 11 लोगों के खिलाफ 11 हजार ४ सौ १२ करोड़ की वित्तीय गड़बड़ी मामले की जांच सीबीआई को सौपी है। इसके बाद से विपक्ष सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है। हालत ये है कि धरने पर बैठे विधायकों को बाहर निकालने के लिए मार्शलों का सहारा लेना पड़ा। कांग्रेस की विधायक कुमारी ज्योति ने सदन के बाहर गैर जिम्मेदाराना व्यवहार किया। उन्होंने भाजपा नेताओं पर गुस्साते हुए मार्शलों पर गमले उठाकर फेंके और वहीं जमीन पर लेट गई।विधायक कोई आम आदमी नहीं होता, उसे लाखों मतदाता चुनते हैं और उससे उच्च आदर्शों, उचित व्यवहार और सज्जनता की अपेक्षा रखते हैं.और जब वही विधायक सदन में जाकर गलत हरकत करते हैं तो आम इंसान अपने आपको ठगा सा महसूस करता है. भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना अच्छी बात है. अपने किसी और अधिकार को पाने के लिए कोई भी आन्दोलन करना चाहिए , अगर नीतिश कुमार ने या उनके साथियों ने कोई गलत काम किया है . पैसों का गबन किया है तो अवश्य ही उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए और अगर नहीं होती तो हर किसको को शांतिपूर्वक आंदोलन करने का अधिकार है , मगर क़ानून हाथ में लेकर सदन का अपमान करना, उद्दंड होकर विधान सभा की छवि धूमल करना किसी भी हालत में उचित नहीं है.विधायकों को यह अधिकार बिलकुल नहीं है कि वे लोकतंत्र की मर्यादा को ही नष्ट करदें. यह पहली बार नहीं हुआ है . इससे पहले विभिन्न प्रदेशों के विधान भवन में माननीयों द्वारा मारपीट की घटनाएं हो चुकी हैं. खूब जूता चप्पल चले हैं, लेकिन यह सिलसिला अब बंद होना चाहिए . सिर्फ कुछ दिनॉ के लिए निलंबन की सजा से कुछ होने वाला नहीं है. आजकल लोग कहते फिरते हैं कि अब पहले जैसे नेता नहीं रहे , जयप्रकाश नारायण जैसे, सरदार पटेल जैसे, महात्मा गांधी जैसे . अब
वे नेता देश के लिए ककुछ भी करने को तैयार रहते थे, वे हमेशा जन हित की बात करते थे. उनका आचरण भी सादगी भरा और निस्वार्थ
होता था . इसलिए लोग उन्हें अपना आदर्श मानते थे. आज की तारीख में ऐसा कौन सा नेता है जिसे लोग अपना आदर्श अमानते हों. इसलिए
किसी एक की बात हो तो अलग है यहाँ तो सभी राजनीतिक पार्टियां और ज्यादातर नेता ही ऐसे हो गए हैं. याबी कि इलाज की नहीं , आपरेशन
की जरूरत है. इसके लिए सख्त क़ानून की व्यवस्था की जरूरत है ,जों कभी पूरी नहीं होने वाली. क्योंकि वही छिनरा , वही डोली के संग वाली बात आड़े आ जाती है. यानि कि क़ानून बनाने वाले भी तो नेता ही हैं . और वे ऐसा कोई क़ानून क्यों बनाएंगे जिसे आगे चलकर वही तोड़ने वाले हों .इस मुश्किल का कोई हल है क्या ?







Monday, July 19, 2010








हादसे पर हादसे , जिम्मेदार कौन ?
टिकट लेकर सफर करने वाले बेकसूरों का क्या दोष ?
फिर एक हादसा हो गया . ट्रेन हादसा . ८० से ज्यादा उन बेकसूरों की मौत हो गयी जों लोग टिकट लेकर सफर कर रहे थे. ममता बनर्जी के १५ महीने के कार्यकाल में यह ११ वां हादसा है. ममता बनर्जी हाकिया हादसे में साजिस की बू तलाश रही हैं तो भाजपा ने उनसे रेल मंत्रालय ही छीन लेने की मांग की है. भले ही यह हादसा मानवीय भूल हो या फिर इसमें किसी तरह की नक्सली साजिस हो ,मगर इसमें नुक्सान सिर्फ उन निर्दोषों का हुआ है जिनकी हिफाजत कंरने की जिम्मेदारी केन्द्र सरकार की थी लेकिन वह अपनी जिम्मेदारी को संभाल नहीं पाई. इसका जिम्मेदार कौन है ? केन्द्र सरकार अगर नक्सली समस्या का समाधान नहीं कर रही है तो इसकी सजा किसको मिलनी चाहिए ? निर्दोष नागरिकों को तो हरगिज नहीं . मगर हो यही रहा है . सब बेगुनाह ही मारे जा रहे हैं. कभी नक्सली घात लगाकर सी आर पी एफ के जवानों को मौत के घाट उतार देते हैं तो कभी किसी नागरिक को . पिछले कुछ समय से ये नक्सली ट्रेन को अपने निशाने पर ले रहे हैं. इसमें भी आम जनता की बलि चढ रही है. सेब चाकू पर गिरे या चाकू सेब पर , इससे नुक्सान तो हमेशा सेब का ही होता है. यही हाल जनता के साथ हो रहा है . हर हाल में शोषण उसकी हो रहा हो. नक्सली सोचते होंगे कि जब वे आम जनता को निशाना बनाएंगे तो केन्द्र सरकार पर दवाब बढ़ेगा , सरकार उनकी मांग मानेगी , मगर सच्चाई इससे दूर है .जितने चाहे जवान /अधिकारी शहीद हों . कितनी ही जनता का खून बहे . केन्द्र की बाहरी सरकार के कान पर जूं रेंगने वाली नहीं है .इसलिए नक्सलियों को अपनी रणनीति बदलनी चाहिए . केन्द्र सरकार को भी नक्सलियों से सख्ती से निपटना चाहिए . और अगर केन्द्र सरकार ऐसा नहीं कर पाति तो उसे सत्ता में बने रहने का कोई हक नहीं है .
वैसे भी यह सरकार हर मोर्चे पर फेल है. केन्द्रीय कृषि मंत्री शरद पवार मंहगाई बढाते जा आरहे हैं. केन्द्रीय पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवरा डीजल, पेट्रोल और घरेलू गैस के दाम बढ़ाकर मंगाई बढाने में अपना योगदान दे रहे हैं. मंनरेगा में अरबों का भ्रष्टाचार है . देश का पैसा मनरेगा जैसी भ्रष्ट योजना में लगाकर कुछ लोगों को तो खुश किया जा रहा है, मगर यह पैसा जिनकी मेहनत और गाढ़ी कमाई की बदौलत विभिन्न टैक्स के माध्यम से आता है , उनका जीना हराम किया जा रहा है . विदेश मंत्री कृष्णा जी अभी हाल ही में पाकिस्तान गए तो उनकी वार्ता भी बुरी तरह फेल हो गयी . दूरसंचार मंत्री पर ३ जी व अन्य सेवाओं की नीलामी में रिश्वत लेने की आरोप लगे. देश की सड़कों का बुरा हाल है . महानगरों को अगर छोड़ दिया जाए तो देश भर में बिजली के लिए त्राहि मम मची हुयी है . कुल मिलाकर हर क्षेत्र में कांग्रेस फेल है . कांग्रेस की सहयोगी पार्टियां, जों कि सरकार में हैं , वे सब बुरी तरह से फेल हैं. लगता है सरकार ऐसे ही रामभरोसे चल रही है .
ऐसी कमजोर सरकार देश का भला नहीं कर सकती, देशवासियों की सुरक्षा भी नहीं कर सकती . इस सरकार का तो बस एक ही इलाज किया जा सकता है . आने वालों चुनावों में इस सरकार में शामिल सभी पार्टियों को विसर्जित कर डालिए . जब तक यह सरकार है तब तक हम ऐसे हादसों और मंहगाई जैसी महामारी को झेलने के लिए अभिशप्त रहेंगे.











Sunday, July 18, 2010

अध्यात्म और अश्लीलता

आजकल देश में बाबागीरी का धंधा खूब जोरों पर चल रहा है . बाबा लोग टी.वी. चैनल में मंहगे-मंहगे विज्ञापन देते हैं, अखबारों में पैड आर्टिकल छपवाते हैं , आलिशान महलों में रहते हैं , मगर नाम आज भी आश्रम का दिया गया है . यानि कि अगर फाइव स्टार महल है तो भी उसका नाम आश्रम ही रहेगा . स्वामी नित्यानंद को पूरे संसार ने एक मोडल के साथ मसाज करवाते हुए , चुम्बन लेते हुए पूरे संसार ने टी.वी . देखा. स्वामी नित्यानंद ने बहुत सफाईयां दीं, यहाँ तक कि खुद को नपुंसक भी बताया , मगर क़ानून के लम्बे हाथों से बच न सके. पुलिस का भी कहना था कि कि अश्लील हरकत करने के लिए सम्पूर्ण मर्द होना जरूरी नहीं होता. उसकी सीडी भी सच निकली . इसलिए जब बाबा का झूठ खुल गया तो उसने बेशर्मी से बयां देने शुरू किये . एक बयान यह भी था कि यू ट्यूब पर उसे सबसे ज्यादा सर्च किया जा रहा है , इस बात पर वे गर्व से फूले नहीं समा रहे थे . उससे पहले आशाराम बापू और उनके बेटे पर भी काला जादू करने , भक्तों पर जानलेवा हमला करवाने , सरकारी जमीन हड़पने और आश्रम में आने वाली महिलाओं के साथ अश्लील हरकत करने तथा उनका शारीरिक शोषण करने के आरोप लगे थे. इस प्रकार सकड़ों कथित बाबाओं पर इस तरह के गंभीर आरोप लग चुके हैं. हाल ही में बाबा ऋषि प्रभाकर पर उनकी पत्नी अरुंधती ने ही गंभीर आरोप लगाकर सबको चौका दिया है. अपने ही पति की पल खोलने वाली अरुंधती अच्छे परिवार से ताल्लुक रखती है . वह महाराष्ट्र के औरंगाबाद की रहने वाली है . इस जिले के कलेकटर उसके पिता हैं. बाबा ऋषि प्रभाकर ने इस जिले में सिद्ध समाधि योग आश्रम बनाया था . यहीं पर अरुंधती की मुलाक़ात ऋषि प्रभाकर से हुई . अरुंधती का कहना है कि उसे किस तरह अरुंधती ने अपने जाल में फंसा लिया, इसका उसे पता ही नहीं चला. जब वह कुंवारी थी तो अपने से कई साल बड़े बाबा के चक्कर में फंस गयी . बाबा ने उसका शारीरिक शोषण तो किया ही , साथ ही उसकी एक अश्लील फिल्म भी बना ली , और उसे लगातार ब्लेकमेल करने लगा. अश्लील सी.डी. की बदौलत ऋषि प्रभाकर ने अरुंधती को मनचाहे तरीके से इस्तेमाल किया. आखिरकार एक दिन ऋषि प्रभाकर ने उससे शादी भी करली. उनका एक दस साल का बेटा भी है. मगर शादी के बाद भी बाबा अपनी हरकतों से बाज नहीं आया. वह और भी कई महिलाओं का शारीरिक शोषण करने लगा . यहाँ कि उनके बेटे ने भी कई बार अपने पिता को दुसरी महिलाओं के साथ आपत्तिजनक अवस्था में देखा है . फिलहाल अरुंधती को बाबा ने आश्रम से निकाल दिया है और वह किराए के मकान में रह रही है . अरुंधती ने इस बाबत अदालत में मुकदमा दायर कर रखा है . अगर बाब की बीवी खुद इस रहस्योद्घाटन से पर्दा नहीं उठाती तो शायद बाबा की असलियत कभी भी जनता के सामने नहीं आपाती . ऐसी बढ़ती घटनाओं के बावजूद भी केन्द्र सरकार अन्धविश्वाश और पाखण्ड फैलाने वाले लोगों के विरुद्ध सख्त क़ानून नहीं बनाती . भारत में सबसे ज्यादा ढोंगी मुफ्त की रोटियां चर रहे हैं. उनके खिलाफ कार्रवाई करने वाला कोई नहीं है. आध्यात्म के नाम पर अश्लीलता और वासना का गंदा खेल खेला जा रहा है. लोगों को भाग्य भरोसे पर रहने की सीख देकर देश को कमजोर करने , प्रतिभाहीन करने की कोशिशें की जा रही हैं, स्त५हिति विस्फोटक हो चुकी है , इसके बावजूद कथित धर्म का यह धंधा खूब फल फूल रहा है . समय रहते इस पर अंकुश नहीं लगाया गया तो मामला और भी बिगड सकता है . आधार ने साधुओं और वैश्याओं की समस्या के समाधान का एक खास नुस्खा निकाला है . राठोड कैसेट कंपनी के गायक और लेखक कहते हैं कि इन दोनों की आपस में शादी कर देनी चाहिए , देश से एक साथ दो समस्याओं का समाधान हो जाएगा

Friday, July 16, 2010

अब इंसान सब्जियां नहीं खाता , सब्जियां इंसान को खा रही हैं.

अब इंसान सब्जियां नहीं खाता , सब्जियां इंसान को खा रही हैं

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अब इंसान सब्जियां नहीं खाता , सब्जियां इंसान को खा रही हैं.

और केन्द्र सरकार है कि चैन के बंशी बजा रही है ,विपक्ष भी मंहगाई को लेकर उतना गंभीर नहीं है, जितना कि होना चाहिए . सभी विपक्षी पार्टियों ने एक दिन का बंद रखा और फिर भूल गईं, कुछ राज्य स्तर की पार्तितों ने भी एकाध दिन हो हल्ला करके मामले को शांत कर दिया. मगर इससे फायदा क्या हुआ. क्या सरकार पर किसी तरह का वजन पड़ा, क्या सरकार ने किसी भी चीज के थोड़े भी दाम घटाए ? नहीं, ऐसा कुछ नहीं हुआ. उलटा अगले ही दिन केन्द्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने यह कहकर धमाका कर दिया कि चीनी को भी सरकारी नियंत्रण से बाहर लाया जाएगा. यानि कि सरकार चीनी पर जों सब्सिडी दिया करती थी, उसे बंद किया जाएगा . इससे चाय पीना भी दुर्लभ हो जाएगा . चीनी की कीमते आस्मां छूने लगेंगी .दुसरा धमाका पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवरा ने यह बयान देकर किया है कि ज्यादा पैसे देकर रसोई गैस के उपभोक्ता कभी भी सिलेंडर मगा सकते हैं. इससे गैस एजेंसी के मालिकों को सरेआम भरष्टाचार करने की पूरी छूट मिल जायेगी . एक तो पहले से ही गैस एजेंसी वाले उपभोक्ताओं को खून के आंसू रुलाते थे, ब्लेक में सिलेंडर देते थे, कम गैस देते थे. मनमाने ढंग से डिलीवरी करते थे . अब मुरली देवरा की शह पर वे और भी ज्यादा निरंकुश हो जायेंगे . अब वे मनमाने तरीके से डिलीवरी देंगे और जब उनकी इच्छा होगी , तब देंगी . जानबूझकर लेट करेंगे और मुहमांगी रकम वसूलेंगे . अतिरिक्त रकम के प्रावधान की बात कहकर मुरली देवरा ने गैस एजेंसी के मालिकों को भ्रष्टाचार करने का खुला लाइसेंस दे दिया है . मंहगाई कम करने के बजाय मंहगाई बढाने के इंतजाम किये जा रहे हैं . हालत ये है कि

महंगाई से पूरा देश त्राही त्राही कर रहा है। सारी कमाई को महंगाई सुरसा के मुंह की तरह निगल रही है। पिछले हफ्ते खाने-पीने की चीजों की महंगाई दर में मामूली सी कमी दिखाई गई, लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर है। महंगाई के वजन से मध्य वर्ग की कमर टूट गई है और गरीबों ने खाने में सब्जी का नाम लेना ही बंद कर दिया है।

हालांकि आंकड़ों के लिहाज से खाने पीने की चीजों की मंहगाई दर 12.63 फीसदी हो गई है। इससे पहले ये 12.93 फीसदी थी। लेकिन आंकड़ों की बाजीगरी की हकीकत कुछऔर ही है।

मुंबई में 40 रुपए किलो बिकने वाले टमाटर की कीमत 60 रुपए किलो पर पहुंच गई है। भिंडी भी 40 रुपए से 60 रुपए किलो हो गई है। 100 रुपए किलो मिलने वाला मटर पूरे 150 रुपए किलो हो गया है। बैंगन के दाम 30 रुपए से 40 रुपए किलो पर जा पहुंचे हैं।

अहमदाबाद में35 रुपए किलो मिलने वाली भिंडी 45 रुपए किलो हो गई है। फूल गोभी 45 रुपए से 60 रुपए किलो हो गई है। करेला 35 रुपए से 40 रुपए किलो होकर स्वाद और कसैला कर रहा है।

लखनऊ में आलू 7 से 8 रुपए किलो मिलता था वो अब 10 से 13 रुपए किलो मिल रहा है। शिमला मिर्च 32 से 36 रुपए किलो मिलती थी वो अब 40 से 48 रुपए किलो मिल रही है। प्याज 8 से 10 रुपए किलो मिलता था अब वो 16 से 20 रुपए किलो होकर लोगों के आंसू निकाल रहा है।लगता है अब इंसान सब्जियां नहीं खाता बल्कि सब्जियां इंसान को खाने लगी हैं.

जाहिर है पूरे देश में खाने-पीने की चीजों के दामों में आग लगी हुई है। और सरकार के तमाम दावे खोखले साबित हुए हैं।इन आंकड़ों ने केन्द्र सरकार के झूठे दावों की पोल खोल डी है , और अब उस क़ानून की मांग जोर पकड़ने लगी है जों सरकार बनने वालों को कभी भी सरकार गिराने का अधिकार देता हो .