Wednesday, June 30, 2010

बलात्कार के दाग

बलात्कार सामाजिक और कानूनी रूप से गलत है ही साथ ही शारीरिक रूप से भी तकलीफदेह होता है. अगर बलात्कार से पीड़ित लड़की एड्स या फिर ऐसे ही किसी रोग से ग्रसित है तो बलात्कारी को यह रोग लग सकता है और अगर बलात्कारी को इस तरह का कोई रोग है तो पीड़ित लड़की /महिला इसकी शिकार हो सकती है. इस तरह उसका पूरा जीवन खराब हो सकता है. जब कोई पीड़ित शिकायत करती है तो बलात्कार पीड़ितों से पुलिस भी बहुत खतरनाक ढंग से पेश आती है और आनी भी चाहिए. दोष सिद्ध होने पर इसकी सजा भी उम्रकैद तक हो सकती है . इस प्रकार क्षणिक आवेग के कारण बलात्कार करने वाला अपनी भी जिंदगी खराब कर्ता है और उस बेगुनाह की भी . इसके अलावा बलात्कार करने वाले का परिवार कभी भी समाज में ऊंचा सिर करके नहीं चल पाता. उसके परिवार को सभी लोग शक और अनादर की निगाह से देखते हैं. इसलिए स्कूल, कोलेज , ट्यूशन आदि में भी बच्चों को बचपन से ही इन सब खतरों से आगाह करने की जरूरत है. सरकार इस तरह के विज्ञापन करे जिससे गलत काम करने वाले को सद्बुद्धि आये. वह इस गुनाह को करने से पहले एक नहीं, कई-कई बार डरे. जब कोई दुष्ट विदेशी मेहमान के साथ यह दुष्कर्म कर्ता है तो उसके और उसके परिवार के साथ-साथ समूचा देश भी शर्मिन्दा होता. है. अखबार और टी.वी. में इस सम्बन्ध में समाचार /आलेख आदि प्रकाशित होते हैं. समूचे विश्व में देश का नाम खराब होता है इसलिए ऐसे मामलों में दुष्कर्म की भयावहता और बढ़ जाती है. अब समय आ गया है जब बलात्कार के मामलों में सरकार को नया और सख्त क़ानून बनाने के बारे में सोचना चाहिए . नया मामला दिल्ली का है . देश की राजधानी में एक ब्राजील की छात्रा के साथ दुष्कर्म किया गया.

पुलिस ने 27 साल की ब्राजीलियाई महिला किराएदार के साथ बलात्कार के आरोपी मकान मालिक को गिरफ्तार कर लिया है।

मेडिकल रिपोर्ट में महिला के साथ बलात्कार की पुष्टि होने के बाद यह गिरफ्तारी हुई। हालांकि उन्होंने आरोपी की पहचान बताने से इंकार कर दिया।

चितरंजन पार्क में हुई यह घटना मंगलवार प्रकाश में आई जब महिला ने शिकायत दर्ज कराई और आरोप लगाया कि कॉफी में नशीला पदार्थ देकर उसके मकान मालिक ने उसके साथ दो बार बलात्कार किया।

नोएडा के एक निजी संस्थान से जनसंचार की पढाई कर रही यह महिला जून के पहले हफ्ते में भारत आई थी। 19 जून तक वह किराए के मकान में थी। महिला ने दावा किया कि 20 जून को उसका मकान मालिक उससे मिलने आया और उसे कॉफी पीने का प्रस्ताव दिया। कॉफी पीने के बाद वह बेहोश हो गई जिसके बाद मकान मालिक ने उसके साथ बलात्कार किया। उस व्यक्ति ने कथित तौर पर 21 जून को भी बलात्कार किया।

27 जून को जब उसने बलात्कार का प्रयास किया तो महिला ने विरोध किया और मकान मालिक को परिसर छोड़कर जाने को कहा।बलात्कार की इस घटना से अपना देश भी विदेशों में शर्मशार हुआ है . यह सिर्फ एक व्यक्ति द्वारा बलात्कार का मामला नहीं है बल्कि ब्राजील के समाचार पत्रों में इसे इस तरह से लिखा जाएगा 'भारतीय ने किया ब्राजील की छात्रा से बलात्कार '. इस तरह उस दुष्कर्मी के साथ अपने प्यारे देश का नाम भी खराब होता है. दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित भी पीड़ित महिला को न्याय दिलाने की बात कर चुकी हैं , यह अच्छी बात है. इससे पहले गोआ में घूमने आई विदेशी लड़कियों के साथ भी इस तरह की कई घटनाएं हुई थीं. एक डबल मामला तो दो -चार दिन पहले ही सामने आया था. पर्यटन स्थलों पर ऐसी घटनाएं अक्सर होती रहती हैं जो चिंताजनक हैं. इसका सख्त समाधान निकालना ही होगा, वरना यह बदनुमा दाग बार -बार लगते रहेंगे .







Monday, June 28, 2010

तन्हाई का दर्द और निराशा मी आत्महत्या

कभी-कभी ऐसा होता है कि इंसान भीड़ में भी अपने आपको तनहा समझ लेता है . इस तन्हाई को दूर करने के लिए वह नशे को अपना साथी बनाना चाहता है. सिगरेट का सहारा , शराब का सहारा और आखिर में आत्महत्या या मौत उसका स्वागत करती है . वैसे तो यह जीवन के कई क्षेत्रों में सदियों से होता चला आ रहा है और आज भी हो रहा है, निश्चित तौर पर पर कहीं न कहीं कभी न कहीं मगर आगे भी होता ही रहेगा. अँधेरी में मशहूर मोडल विवेका बाबाजी की साथ भी तो यही हुआ. वह अँधेरी के फ्लेट में अकेले रहती थी. कहा जा रहा है कि उसने नशे की हालत में आत्महत्या करली, उसकी लाश के पास से पुलिस ने सिगरेट के बहुत सारे टोटे भी बरामद किये.मॉडल विवेका बाबाजी की कथित आत्महत्या मामले में उनके प्रेमी गौतम वोहरा ने अदालत में बयान दिया है कि उनका कभी भी विवेका के साथ शादी का इरादा नहीं था। वे दोनो सिर्फ एक अच्छे दोस्त थे। इससे अधिक कुछ भी नहीं। इस केस में शुरु से ही विवेका के दोस्त गौतम वोरा का नाम सामने आ रहा है। शुक्रवार को विवेका की खुदकुशी के बाद से ही गौतम लापता था, उसका फोन भी बंद था। खार पुलिस ने गौतम को तत्काल थाने में रिपोर्ट करने के निर्देश दिए थे। जिसके बाद वह सोमवार को अदालत में पेश हुआ।
दूसरी ओर, विवेका की बिसरा रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कथित आत्महत्या के पहले उसने जमकर नींद की गोलियां खाई थी। विवेका का जुहू के एक शवदाह में अंतिम संस्कार कर दिया गया। विवेका की मौत से पूरा परिवार सदमे में है।विवेका बाबाजी की कथित खुदकुशी में हर दिन नए-नए खुलासे हो रहे हैं। पुलिस को अब उनकी बॉडी से से भारी मात्रा में नींद की गोलियों के साथ हाइड्रोक्लोरिक एसिड मिला। जिसका मिश्रण किसी जहर से कम नहीं है। पुलिस अब उनके पांचों पूर्व प्रेमी से पूछताछ की तैयारी कर रही है। पुलिस को शक है कि उन्होंने खुदकुशी नहीं बल्कि उनकी हत्या हुई है। जिसमें कोई भी शामिल हो सकता है।खार पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस इंस्पेक्टर मंगेश पोटे ने बताया कि मॉडल की हत्या के संबंध में जल्दी उनके सभी प्रेमियों से बातचीत की जाएगी। इसके अलावा हम इस एंगल से भी जांच कर रहे हैं कि कहीं बाबाजी को मारने के लिए जहर तो नहीं दिया गया था। पुलिस के अनुसार, विवेका की बिसरा रिपोर्ट में कुछ ऐसे तत्व मिले हैं जो कि जहर की तरफ इशारा कर रहे हैं। पोस्टमार्टम की रिपोर्ट इशारा कर रही है कि हो सकता है उसने आत्महत्या नहीं की हो बल्कि उसका क़त्ल किया गया है. पुलिस जांच में जुटी है और जल्द ही यह उजागर हो जाएगा कि असलियत क्या है ,मगर सच जो हो यह भी कटु सत्य है कि अगर विवेका बाबाजी अकेली न रह रही होती और अपने परिवार के साथ होती तो शायद यह हादसा नहीं हो पाता . असल में आज की युवा पीढ़ी चमक -दमक भरी जिंदगी जीने के लिए इतनी बेताब है कि उसके और उसके परिवार के विचारों में अचानक जमीन -आसमान का अंतर आ जाता है . यही वजह है कि फैशन या फिल्म इंडस्ट्री से ताल्लुक रखने वाली ज्यादातर लड़कियां अपने परिवार से अलग रहती हैं. ऐसे में उनके सम्बन्ध हम उम्र या हमपेशा लड़कों से हो जाते हैं. काम के तनाव के कारण वे नशे की आदी हो जाती हैं और नशे में वे क्या कर रही हैं , इसका पता बहुत बाद में चलता है . जब तक वे मामले को संभालने की कोशिश करती हैं तब तक सब कुछ फिनिश हो जाता है . बहुत देर हो चुकी होती हैं. दिल्ली की एक मोडल को दिल्ली की सड़कों पर पागलों की तरह घुमते हुए कई टी.वे चैनलों ने दिखाया था. इसी तरह पहले भी दो मोडल आत्महत्या कर चुकी हैं और कईयों को मौत के घाट उतारा जा चुका है .पता नहीं पुलिस इस मामले में क्या जांच रिपोर्ट पेश करती है मगर यह सत्य है कि तन्हाई का दर्द और निराशा फिल्म इंडस्ट्री और फैशन जगत से जुड़े लोगों को आत्महत्या की तरफ धकेल रहा है . इस सिलसिले को ये लोग खुद ही रोक सकते हैं. अगर हम हमारे सपनों की ऊंचाई की तरह हौंसले को भी ऊंचा रखें तो इस स्थिति से आसानी से लड़ा जा सकता है. सफलता बुरी चीज नहीं है , मगर उसके लिए घर परिवार का त्याग जन बूझकर नहीं करना चाहिए . क्योंकि घर में एक दुसरे से अपना दुःख कहने -सुनने से भी वह हल्का हो जाता है. यह समझना चाहिए कि इस धरती पर हर समस्या का समाधान मौजूद है. मालिक ने हर इंसान को ऐसी शक्ति दी है , बस उसका उपयोग करना आना चाहिए .

Sunday, June 27, 2010

यू.पी. के मंत्रियों की नजर में ब्रह्मा जी बेटी चो....

पीडब्लूडी मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दकी, परिवार कल्याण मंत्री बाबू कुशवाहा, सहकारिता मंत्री व बसपा अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य, ग्राम विकास मंत्री दद्दू प्रसाद, राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष पारसनाथ मौर्य, ये हैं उत्तर प्रदेश के विशेष मंत्री , विशेष इसलिए क्योंकि ये सभी उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती के करीबी कहे जाते हैं , इन सभी को बसपा की दूसरी पंक्ति का नेता माना जाता है . जौनपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने राधेश्याम वर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए यूपी के पांच मंत्रियों समेत नौ लोगों के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया गया है। इसमें पत्रिका के संपादक डॉक्टर राजीव रत्न , सुषमा , लेखक अश्विनी कुमार शाक्य और अशोक आनंद भी शामिल हैं। कोर्ट ने पीडब्लूडी मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दकी, परिवार कल्याण मंत्री बाबू कुशवाहा, सहकारिता मंत्री व बसपा अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य, ग्राम विकास मंत्री दद्दू प्रसाद, राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष पारसनाथ मौर्य हैं। इस प्रकार कुल ९ आरोपियों के विरुद्ध महात्मा गांधी सहित हिंदू देवी देवताओं के विरुद्ध आपत्तिजनक टिप्पणी करने का मामला दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं. इससे राजनीतिक क्षेत्रों में तूफ़ान उठ खडा हुआ है. विपक्षी पार्टियों को यह ऐसा मुद्दा हाथ लग गया है जिसे वे जमकर भुनाना चाहते हैं. इस मामले से मायावती की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँची है और उनकी ' सर्वजन हिताय , सर्वजन सुखाय ' मुहिम को नुक्सान पहुंचेगा . ऐसे समय में जब मायावती की तुलना अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा से की जा रही थी और उन्हें प्रधानमंत्री पद का दावेदार दर्शाया जा रहा था , ऐसे समय में सवर्ण समाज को नाराज करने का खामियाजा उन्हें अगले चुनाव में भुगतना पड सकता है. 'आंबेडकर टुडे नामक जिस पत्रिका के बारे में बवाल मच रहा है उसके मालिक डॉक्टर राजीव रत्न स्वामी प्रसाद मौर्या की करीबी और राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त पारसनाथ मौर्या के बेटे हैं. उपरोक्त मंत्रियों का नाम बाकायदा संरक्षक के तौर पर छपता था, इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि इसकी जानकारी इन मंत्रियों को नहीं थी.
क्या है मामला ? - दरअसल लखनऊ से छापने वाली पत्रिका आंबेडकर टुडे में हिंदू धर्म , महात्मा गांधी और देवी -देवताओं के बारे में आपत्ति जनक बातें प्रकाशित होती थीं जैसे कि इसके पृष्ठ 31 पर एक आलेख में लेखक श्री अश्विनी कुमार शाक्य पुत्र श्री पी. एल. शाक्य जिनका पता पत्रिका के अनुसार ‘पगारा रोड, जौरा, जिला मुरैना, मध्य प्रदेश’ अंकित है, के द्वारा जिस तरह की भाषा का प्रयोग किया गया है वह अकथनीय है।बानगी देखिये -

वैदिक ब्राह्मण और उसका धर्म शीर्षक से प्रस्तुत तालिका में वे कहते हैं कि हिन्दू धर्म ‘मानव मूल्यों पर कलंक’’ है.

हिन्दू धर्म को ‘‘त्याज्य धर्म’’ बताया गया है, इसे ‘‘भोन्दू और रोन्दू’’ धर्म व ‘‘पापगढ़’’ कहा गया है.

वेद क्रूर, निर्दयी, जंगली, बेवकूफी का म्यूजियम, मूर्खताओं का इन्द्रजाल बताये गये हैं.

हिन्दू धर्मशास्त्र निकृष्ट शास्त्र कहे गये हैं.

33 करोड़ देवता गैंगस्टर, कपटी, षडयंत्री, क्रूर और हत्यारे कहे गये हैं.जोश में आकर वे आगे लिखते हैं कि सृष्टिकर्ता ब्रह्मा ‘‘बेटीचो...' है . यह ऐसी गाली है जिसे ज्यों की त्यों प्रकाशित करने के बजाय ... कर दिया गया है. मै २०१० के अंक में छपे इन आपत्तिजनक लेखों के कारण कई जिलों में विरोध प्रदर्शन भी किये गए थे.

दलित बुद्धिजीवी भी नाखुश -मंत्री का बेटा और स्वामीप्रसाद मौर्य का करीबी होने के कारण डॉक्टर राजीव को कई लाख रुपये का सरकारी पुरस्कार दिया गया था, उनकी पत्रिका को भी लाखों के विज्ञापन मिलते रहे हैं . इतना ही नहीं , उनकी शादी के बाद ही उनकी पत्नी को सरकारी अधिकारी बना दिया गया. इस मामले से दलित बुद्धिजीवी भी खुश नहीं हैं. 'ज़िंदा देवी ' जैसी मायावती समर्थक पुस्तक लिखकर चर्चा में आये साहित्यकार दुसाध का मानना है कि जो सच्चे साहित्यकार हैं, उनकी कोई सुधि नहीं लेता , जो चाटुकार हैं, उनको उत्तर प्रदेश सरकार पुरष्कृत कर रही है.

अभिव्यक्ति की आजादी - यह ठीक है कि हर इंसान को अपना दुःख बयान का पूरा अधिकार है. अपनी बात सब कह सकते हैं. अपने विचार रख सकते हैं. मगर किसी को गाली देना गलत है.सच कहा जा सकता है मगर सादगी और गरिमा पूर्वक . अगर ब्रह्मा ने कुछ कुछ गलत किया तो उसे तथ्य्पूर्वक संवैधानिक भाषा में लिखा जा सकता है. अपनी तरफ से असंसदीय भाषा इस्तेमाल करना उचित नहीं है. अगर कहीं किसी देवता ने गलत कार्य किया है तो उसे पुस्तक के नाम , पेज आदि का उदाहरण देकर अपनी बात राखी जा सकती है. अपनी विचारधारा को रखा जा सकता है, उसका समर्थन किया जा सकता है , मगर दुसरे के विचारों को गलत बताना , उसका अपमान करना मानव हित में नहीं है .

समर्थक या विरोधी ?- यह सच है कि जब १४ अप्रैल १९८४ को बहुजन समाज पार्टी के गठन हुआ तो बसपा कार्यकर्ता हिंदू धर्म का उग्र विरोध करते थे, देवी -देवताओं की हरकतों को , मनुवादी चालों को उजागर किया करते थे. विषमता फैलाने वाले, पाखण्ड रचने वाले, छूआछात फैलाने वाले तत्वों का खुलासा करते थे ,उस समय बसपा का नारा हुआ करता था-'बहुजन हिताय , बहुजन सुखाय '. मगर मायावती ने इसमें संसोधन कर नया नारा दिया-'सर्वजन हिताय , सर्वजन सुखाय '. इसको सोशल इंजीनियरिंग का नाम दिया गया. परिणाम भी सुखद आया. बसपा की स्पष्ट बहुमत की सरकार बनी. अब , जबकि देश का बहुजन समाज मायावती को प्रधानमंत्री बनाने का सपना देख रहा है ऐसे में डो समुदाय के बीच नफरत की खाई पैदा करना बसपा के विरोधियों का काम है या समर्थकों का ? सवाल पूरे बहुजन संमाज का है और जवाब है सिर्फ बहनजी के पास.









Friday, June 25, 2010

फिर बढे डीजल , पेट्रोल ,केरोसिन और रसोई गैस के दाम, और दो कांग्रेस को वोट

एक बार फिर से डीजल , पेट्रोल , केरोसिन और रसोई गैस के दाम बढा दिए गए हैं. इसके अलावा सरकार ने सब्सिडी भी हमेशा के लिए खत्म कर दी है. इससे अब भविष्य में अंतर्राष्ट्रीय बाजार के हिसाब से पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें वसूली जायेंगी. इससे पहले भी यह सरकार कई बार दाम बढा चुकी है. हाल ही में सी एन जी, एल पी जी के दाम बढाए गए हैं . इसका दुष्प्रभाव ये हुआ कि मुंबई , दिल्ली में आटो, टैक्सी के दाम बढ़ गए . अब होगा ये कि हर चीज और भी मंहगी हो जायेगी . दूध, दही , घी , पनीर, सभी तरह की सब्जियां, प्राइवेट वाहनों का भाडा सब पर मंहगाई का भार बढ़ जाएगा . पहले से ही मंहगाई से लोगों का बुरा हाल था . किसी तरह से घर का किचन चलाया जा रहा था , अब वो भी मुश्किल हो जाएगा. खाने की थाली में अब न जाने क्या बचेगा . ई जी ओ एम् की कीमत बढाने की घोषणा से देश सन्न हो गया है. केन्द्रीय रेल मंत्री ममता बनर्जी ने एक दिन पहले ही प्रणव मुखर्जी से मिलकर अपील की थी कि पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें नहीं बढनी चाहिए . विरोध स्वरूप वे कैबिनेट की बैठक में भी नहीं गयी थीं. मगर उनके विरोध का कोई असर नहीं हुआ. कीमतें आखिरकार बढ़ा दी गईं, अब ममता क्या करेंगी ? क्या वे मंत्रीपद छोड़ देंगी ? क्या उनका विरोध सच्चा था , या महज ड्रामा था ? अगर ड्रामा नहीं था तो उन्होंने मंत्रीपद छोड़ क्यों नहीं दिया ? वे चाहें तो सरकार गिराई जा सकती है. उनेहं बस पहल करने की जरूरत है. मगर सत्ता का सुख जनता के लिए छोड़ना बहुत मुश्किल काम होता है. हमारे नेता सिर्फ जनता की भलाई करने का नाटक करते हैं. जब वे नाटक करने भर से ही सत्ता का सुख भोग सकते हैं तो उन्हें सचमुच जनता की भलाई करने की क्या जरूरत हा. कांग्रेसियों को मालूम है कि भारत की जो जनता वोट देती है , वह ज्यादातर बिकाऊ या भडकाऊ है. किसी ने जातिवाद का नारा बुलंद किया तब भड़क गयी. अपना कीमती वोट जातिवाद की राजनीति करने वालों को दे दिया, और किसी साम्प्रदायिक पार्टी ने धर्म का नारा दिया तब भी आसान से बहाल जाती है, अपने वोट सम्प्रदाय के नाम पर समर्पित कर देती है.रही सही कसर नोटों से पूरी हो जाती है. कांग्रेस के लोग आराम से उन लोगों के वोट खरीद लेते हैं. जो लोग अपना वोट बेचते हैं वे एक दो दिन तो मुर्ग मसल्लम का स्वाद चखते हैं, दारु पीने को मिलती है मगर अगले पांच सालों तक नेता उनके वोट वसूलकर उनका खून चूसते हैं. काँग्रेस ने आम आदमी के हित का वादा करके लोगो से वोट वसूले थे, अब उसी जनता के साथ अन्याय किया जा रहा है. पहले से ही जो लोग दाने -दाने को मोहताज थे , उन पर जानलेवा मंहगाई का शिकंजा कस दिया गया है.भाजपा ने इस बढोतरी को जनता को तहस -नहस करने वाला कदम बता रही है. उसने पूरे देश में आंदोलन करने का एलान किया है . भाजपा ने कहा है कि कांग्रेस देश के लोगों के साथ अन्याय कर रही है. इस बार भी सोनिया गांधी और राहुल गांधी चुप हैं. भले ही सोनिया गांधी इस देश में जन्मी नहीं है , यहाँ के बारे में ज्यादा नहीं जानतीं, मगर राहुल गांधी तो यहाँ की गरीबी और बेरोजगारी से अच्छी तरह से परिचित हैं. वे अपनी सरकार से इस सम्बन्ध में बात क्यों नहीं करते ? आखिर इतनी मंहगाई बढाने से कांग्रेस को मिलने वाला क्या है ? ऐसा लगता है कि कांग्रेस सिर्फ कुछ चुनिन्दा दलालों, कारपोरेट घरानों और मुनाफेखोरों की भलाई के बारे में ही सोचती है. ऐसी निकम्मी सरकार को एक पल भी पावर में रहने का अधिकार नहीं है. देशवासियों में अगर ज़रा भी नैतिकता है तो अगली बार चाहे किसीको भी दें मगर कांग्रेस और उसके सहयोगियों को हरगिज वोट नहीं करें. वोट के खरीदारों को एक बार यह एहसास कराने का वक्त आ गया है कि हमारे वोटों से चुने जाने वालों को बाप बनने का अधिकार नहीं है. जिसे हम जन्म देते हैं वो हमारी औलाद होती है. हमारे वोटों से मंत्री , मुख्यमंत्री , प्रधानमंत्री बनने वालों को याद दिलाना होगा कि वे हमारी वोटों से पैदा हुए हैं , इसलिए वे बेटे हुए और बेटे बनकर रहें तो बेहतर वरना अगली बार लायक औलाद पैदा की जायेगी

























Thursday, June 24, 2010

विचार मंच
जिन्ना अब धर्मनिरपेक्ष हो गए हैं क्या ?
खबर है कि भारतीय जनता पार्टी के पूर्व वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह फिर से भाजपा में शामिल होने वाले हैं
बहुत संभव है कि इस लेख को प्रकाशित होने से पहले या कुछ देर /दिन बाद वे शामिल ह भी जाएँ. ये वही जसवंत सिंह हैं जिन्होंने अपनी पुस्तक में पाकिस्तान के संस्थापक और वहाँ के पूर्व शासक मोहम्मद अली जिन्ना को धर्मनिरपेक्ष बताया था. उनकी पुस्तक आते ही ऐसा बवाल मचा कि उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. हांलाकि उन्होंने कोई नई बात नहीं कही अथवा लिखी थी. इससे पहले भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी भी पाकिस्तान जाकर जिन्ना की तारीफ़ कर चुके थे. मगर उस मामले और जसवंत सिंह के मामले में अलग-अलग मापदंड अपनाए गए. जब पार्टी एक है तो पार्टी के विधान दो कैसे हो सकते हैं ? यह मामला उस समय खूब उठा था. यहाँ तक कि भाजपा के तत्कालीन वरिष्ठ नेता और सुप्रसिद्ध पत्रकार अरुण शौरी ने भी इस मुद्दे को उठाया था, लेकिन किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया. उस समय बात तो यहाँ तक कही गयी थी कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल विहारी वाजपेयी की इच्छा के विरुद्ध उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया . इसी तरह इससे पहले उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य मंत्री कल्याण सिंह और मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था. उससे भी पहले भाजपा का थिंक टेंक कहे जाने वाले गोविन्दाचार्य को पार्टी से निकाल बाहर किया गया. भाजपा से निकले इन सभी नेताओं ने खूब हाथ पैर मारे , कल्याण सिंह ने कभी जाट नेता अजीत सिंह का हाथ थामा तो कभी उन्होंने मुलायम सिंह यादव् से गठबंधन किया . मगर अपने बेटे और शिष्या को विधायक बनाने के अलावा कुछ खास करिश्मा नहीं दिखा पाए. अब तो वे अपनी खुद की पार्टी भी बना चुके हैं लेकिन उनके जिले और गिने -चुने क्षेत्रों के अलावा अभी तक वे अपनी पार्टी का संगठन तक भी नहीं बना पाए हैं. उमा भारती भी अपने पार्टी का गठन कर चुनाव लड़,लडवा और हार चुकी हैं. इसके बावजूद यह तथ्य उभरकर सामने आया कि भाजपा से निकले हुए लोग भले ही अकेले राष्ट्रीय अथवा प्रादेशिक राजनीति में कोई तीर नैन मार पाए मगर इन्होने भाजपा का बहुत नुक्सान पहुंचाया . अगर ये लोग भाजपा में होते तो निश्चित तौर पर भाजपा का हाल कुछ अलग ही होता. हो सकता है कि इस समय केन्द्र में भाजपा की सरकार भी होती . क्योंकि ये सभी नेता अपने -अपने प्रदेशों के धुरंधर नेता हुए करते थे मगर भाजपा की आपसी कलह ने दिग्गजों को पार्टी से बाहर करवा दिया. इसी गुटबाजी के कारण भाजपा हर जगह से हारती गयी. उत्तर प्रदेश में वह तीसरे -चौथे नंबर की पार्टी बनकर रह गयी. केन्द्र में दो -दो बार मुंह की खानी पडी. इन्हीं सब कारणों से अब आर एस एस और भाजपा के रणनीतिकारों को अपने पुराने साथियों की याद सताने लगी है. इसी वजह से छत्तीस गढ़ के मुख्यमंत्री रमण सिंह के निजी कार्यक्रम के बहाने लालकृष्ण आडवाणी अब उमा भारती को अपने हेलिकोप्टर में उनके घर ले जा रहे हैं. इधर जसवंत सिंह के लिए पार्टी के दरवाजे खोल दिए गए हैं. इसी प्रकार कल्याण सिंह पर भी डोरे डालने शुरू कर दिए गए हैं. पिछले दिनों न्भाज्पा के राष्ट्रे अध्यक्ष नितिन गडकरी ने भी पार्टी के अंदर गुटबाजी होने की बात स्वीकार की थी . अगर भाजपा को अपना ख्या हुया पुराना वैभव वापस लाना है तो उसे अपने साथियों को तो मनाकर घर लाना ही होगा साथ ही यू पी ए सरकार की जन विरोधी नीतियों को घर -घर उजागर करना होगा . साथ ही देश की जनता को यह भी बताना होगा कि आखिर उसके पास ऐसी कौन सी अच्छी नीतियां हैं,जिनसे वह बेहतर सरकार दे सकती है. भाजपा को एक बात अच्छी तरह से सोच लेनी चाहिए के देश के वोटर अब दस साल पहले जैसे वोटर नहीं रहे. अब वे सिर्फ सवाल उठाने से खुश नहीं होते बल्कि अब वे उन सवालों के जवाब भी चाहते हैं.अगर भाजपा के रणनीतिकार यह सोचते हैं कि राम या धर्म के नाम पर वे लोगों की भानाओं को भडका सकते हैं और उन्हीं भावनाओं के रथ पर सवार होकर देश पर शासन कर लेंगे तो यह उनकी बहुत बड़ी भूल है. अब राम से ज्यादा रोटी और भावनाओं से ज्यादा विकास महतवपूर्ण हो चूका है. कांग्रेस की तरह दुश्मनों के वोट बाँट कर या वोट खरीदने के घृणित खेल को अब कोई नहीं दोहराना चाहेगा , मगर मतदाता भाजपा की तरफ तभी मुडेंगे जब उसके नेता संगठित रहेंगे और कांग्रेस की कमर तोड़ मंहगाई , सरकारी महकमे में जानलेवा भ्रष्टाचार, नक्सलवाद , उग्रवाद , आतंकवाद आदि को उजागर कर उसके ठोस इलाज का दावा और वादा करेंगे साथ ही यह भरोसा भी दिलाएंगे कि वे पाना वादा अवश्य पूरा करेंगे.




Wednesday, June 23, 2010

कब गिरफ्तार होंगे मासूम बच्चियों के हत्यारे ?
मुंबई के कुर्ला क्षेत्र में एक के बाद एक तीन मासूम बच्चियों की आबरू लूटने के बाद बेरहमी से ह्त्या कर दी गयी है. कार्रवाई के नाम पर स्थानीय पुलिस इन्स्पेक्टर प्रकाश काले का तबादला कर दिया गया है. ७९ लोगों को निर्वस्त्र कर जांच की गयी, मेडिकल कराया गया और ७० लोगों का डी एन ए टेस्ट करवाया गया है. संदिग्धों के स्केच जारी किये गए हैं और कई टीमों का गठन किया गया है . खुद मुंबई पुलिस आयुक्त संजीव दयाल आला अधिकारियों के साथ बैठक कर चुके हैं , इसके बावजूद बलात्कारी हत्यारे अभी तक पकड़ से दूर हैं. स्कोट लेंड यार्ड के बाद पूरे विश्व में मुंबई पुलिस को सबसे ज्यादा सक्षम माना जाता रहा है. मगर इस घटना ने इस किवदंती पर पूर्ण विराम लगा दिया है. इतने ज्यादा लोगों की जांच करने से साफ़ हो जाता है कि अभी तक पुलिस अँधेरे में ही तीर मार रही है. कोई ठोस सुराग नहीं मिल पाया है . पूरा पुलिस महकमा जैसे फेल सा हो गया है. कुर्ला के लोगों का पुलिस से भरोसा उठ चुका है. वे डरे सहमे हैं और समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर क्या करें . पुलिस की नाकामी से उनका डर और भी ज्यादा बढ़ता जा रहा है . लोग अपने बच्चों को अकेला छोड़ने से डर रहे हैं. जो लोग रोजाना कमाते हैं , रोजाना खाते हैं , उनके लिए बच्चों की देखभाल करना बड़ा मुश्किल हो गया है. अब यहाँ पर राजनीति भी शुरू हो गयी है. भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता गोपीनाथ मुंडे ने कुर्ला का दौरा कर गृहमंत्री के इस्तीफे की मांग की है तो दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी ने सैकड़ों लोगों का मोर्चा निकालकर पुलिस पर दवाब बनाया . लोग ये जानना चाहते हैं कि आखिर अभी तक पुलिस को इस मामले में सफलता क्यों नहीं मिल पा रही है . ऐसा कौन सा अपराधी या आपराधिक गिरोह है जिसके हौंसले इतने बुलंद हैं कि वह वारदात पर वारदात को अंजाम दिए जा रहे हैं .ऐसे चुनौती देने वाले की गर्दन अभी तक क़ानून के लंबे हाथों से दूर क्यों है ? ये ऐसे सवाल हैं जिनसे आजकल हर मुम्बईकर जूझ रहा है . अगर इसकी जड़ में जाएँ तो पता चलेगा कि कहीं न कहीं इसके लिए पुलिस ही जिम्मेदार है. कुर्ला सहित मुंबई के बहुत से इलाकों में वीडियो पार्लर खुलेआंम चलाये जा रहे हैं. वहाँ पर ब्लू फ़िल्में धडल्ले से चलाई जा रही हैं. सभी नियम क़ानून की धज्जियाँ उड़ाकर ये सब किया जा रहा है . कम उम्र के लड़कों को बलात्कार जैसे जघन्य अपराध के लिए उकसाने में इन वीडियो पार्लर का भी बहुत बड़ा योगदान है और ये वीडियो पार्लर ऐसे ही नहीं चलाये जाते बल्कि इसलिए पुलिस को बाकायदा हफ्ता दिया जाता है . यहाँ तक कि इलाके के गुंडे और नेता भी इन वीडियो पार्लर चलाने वालों से हफ्ता वसूलते हैं. अगर मुंबई पुलिस चाहती है कि बलात्कार और क़त्ल की वारदातों पर सचमुच काबू पाना है तो सबसे पहले मुंबई और आसपास के क्षेत्रों से उन वीडियों पार्लर को बंद कराये जाने की जरूरत है जिसके कारण युवा पीढ़ी पथभ्रष्ट हो रही है. जिस प्रकार गृह मंत्री आर आर पाटिल ने लेडिज बार बंद कराने में मेहनत की थी , वैसे ही उन्हें सख्ती से इन वीडियो पार्लर को हटाना चाहिए . प्रत्येक इलाके के सीनियर इन्स्पेक्टर को इसके लिए जवाबदेही देनी चाहिए . तब जाकर इस तरह की घटनाओं में कमी आएगी. अब अगर मुंबई पुलिस को अपनी इज्जत बचानी है तो कुर्ला सीरियल किलिंग प्रकरण के अपराधियों को जल्द से जल्द हथकड़ी लगानी चाहिए .












Monday, June 21, 2010

जातिवाद की आग में धधकती मोहब्बत

ओनर किलिंग के मामले में अब सुप्रीम कोर्ट को सुध आई है . सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस मामले में ९ राज्यों को नोटिस जारी किये गए हैं. हरियाणा और दिल्ली में कल दो अलग-अलग स्थानों पर चार प्रेमी-प्रेमिकाओं को मौत के घाट उतार दिया गया. इन चारों का गुनाह इतना ही था कि इन्होने जाति , गोत्र आदि की सीमाओं को लांघकर एक दूसरे से प्रेम किया था और साथ-साथ जिंदगी बिता रहे थे .दिल्ली के अशोक विहार के ब्लॉक नंबर आई में रहने वाले एक दंपती की हत्या कर दी गई। महिला की लाश फ्लैट नंबर १/१६७ से मिली है। जबकि उसके पति की लाश बाहर खड़ी कार के पास से पुलिस ने बरामद की। दोनों गुड़गांव की एक कंपनी में काम करते थे।
2006 में राजपूत जाति के कुलदीप सिंह ने गूजर समुदाय की मोनिका से प्रेम विवाह किया था। दोनों ने परिवार वालों की मर्जी के खिलाफ शादी की थी। तभी से दोनों पक्षों में तनातनी चल रही थी। इसका अंत उन दोनों के अंत के साथ हुआ. मोनिका की गूजर जाति के लोगों को यह बात नागवार गुजरती थी कि राजपूत समाज का लड़का उनका दामाद बने. ये बात अलग है कि कुलदीप और मोनिका एक दूसरे से बेपनाह मोहब्बत करते थे और दोनों शादी के बंधन में बंधकर अलग रह रहे थे. मगर मोहब्बत के दुशमनों को यह बात भी रास नहीं आई. उन्हें यह गवारा नहीं था कि वे दोनों एक साथ रहें. इसलिए उन दोनों की बेरहमी से ह्त्या कर दी गयी.
ऑनर किलिंग के लिए कुख्यात हरियाणा में एक और प्रेमी जोड़े की जान ले ली गई। जिले के नीमड़ीवाली गांव में एक छात्रा और उसके हम उम्र युवक की लाशें एक मकान में शहतीर पर लटकी मिलीं। जान गंवाने वाली इंटर की छात्रा मोनिका बोहरा (18) नीमड़ीवाली के दलवीर सिंह की बेटी थी जबकि युवक प्रदीप (19) मानहेरू गांव के जयभगवान का बेटा था। प्रदीप नीमड़ीवाली में अपने मामा के साथ दूध का काम करता था।इन दोनों का प्रेम उनके घरवालों को रास नहीं आरहा था. इसी कारण दोनों को पहले समझाया गया, और जब वे अलग नहीं हुए तो उन्हें हमेशा के लिए मौत की नींद सुला दिया गया. इस तरह एक ही दिन में दो अलग-अलग राज्यों में चार प्रेमी जोड़ों की ह्त्या कर दी गयी. सुप्रीम कोर्ट ने ओनर किलिंग की बढ़ती घटनाओं के सन्दर्भ में ९ राज्यों को नोटिस भेजे हैं, मगर सरकारें खामोश हैं. राज्य सरकार इस मामले में कोई ठोस निर्णय नहीं ले पा रही हैं. हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा समस्या को हल करने की बजाय उसे और बढ़ावा दे रहे हैं. राहुल गांधी और सोनिया गांधी की नाराजगी के बावजूद हुड्डा इस समस्या के समाधान के लिए चिंतित/प्रयासरत दिखाई नहीं देते. अगर धायं से देखा जाए तो इस समस्या की जड़ में जातिवाद का जहर भरा हुआ है. खुद की जाति को श्रेष्ट समझना और सामने वाले की जातो निम्न समझना ही मूल विवाद की जड़ है. दिल्ली , राजस्थान , हरियाणा , उत्तर प्रदेश की सरकारों को महाराष्ट्र सरकार से सबक सीखना चाहिए . महाराष्ट्र की सरकार की तरफ से अंतरजातीय विवाह करने वालों को ५० हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है. यानि कि अगर अगर कोई लड़का या लड़की अपने से दुसरी जाति के लड़का या लड़की से विवाह करते हैं तो तो सरकार उन्हें ५० हजार रुपये का इनाम देती है. इस कारण वहां पर ओनर किलिंग जैसी घटनाएं न के समान होती हैं , या तो होती ही नहीं हैं. इसी तरह अगर दूसरे राज्य की सरकारें भी अंतरजातीय /अंतरधर्मीय विवाहों को प्रोत्साहन दे, और जो लोग परें करने वालों को परेशान करते हैं उन्हें सख्त दंड दें तो समस्या का समाधान हो सकता है.लेकिन वहां पर उलटा ही होता है . वहाँ सरकार दो अलग- अलग जाति में प्यार या शादी करने वालों को पुरस्कृत करने के बजाय दण्डित करती है. पुलिस कभी भी लड़के -लड़की को सपोर्ट नहीं करती .क्योंकि उन्हें लड़का -लड़की की तरफ से रिश्वत नहीं मिलती , उनके घरवाले उन्हें मनचाही रिश्वत दे देते हैं. इस कारण वे उनका पक्ष लेते हैं. देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट के नोटिस का बाद उन राज्यों की सरकार कितनी सजग होती हैं ? पता नहीं कब तक बेगुनाह प्यार करने वालों को मौत के घाट उतारा जाएगा ?